Tuesday, March 16, 2010

इनकी मुस्कान में उनका दर्द






ये हैं डाक्टर नयना पटेल की आणंद मे क्लिनिक। यहां 10 दिन के बच्चे के साथ किराए की कोख से पैदा हुए 10 दिन के ब्चचे को निहारते हुए उसके आभासी मां बाप कैसे मुस्करा रहे हैं लेकिन ऊपर इन भारतीय मांओं को देखिए। ये रोजी रोटी के लिए अपनी कोख को यहां बेचती हैं। यही तेजी से बढ़ता भारत देश। हा धिक्।

Sunday, March 14, 2010

मैं इस उम्मीद पे डूबा कि तू बचा लेगा


बरेली --सांप्रदायि-सद्भाव लौटाने --लिए बुलाई गई बैठ-में रो पड़े शायर वसीम बरेलवी।

मैं इस उम्मीद पे डूबा कि तू बचा लेगा
अब इसके बाद मेरा इम्तेहान क्या लेगा

यह एक मेला है वादा किसी से क्या लेगा
ढलेगा दिन तो हर एक अपना रास्ता लेगा

मैं बुझ गया तो हमेशा को बुझ ही जाऊँगा
कोई चिराग नहीं हूँ जो फिर जला लेगा

कलेजा चाहिए दुश्मन से दुश्मनी के लिए
जो बे-अमल है वो बदला किसी से क्या लेगा

मैं उसका हो नहीं सकता बता न देना उसे
सुनेगा तो लकीरें हाथ की अपनी वो सब जला लेगा

हज़ार तोड़ के आ जाऊं उस से रिश्ता वसीम
मैं जानता हूँ वो जब चाहेगा बुला लेगा
vaseem bareilvy