Saturday, May 24, 2008

पत्तरकारिताः जो जानते हैं वह न्यूज नहीं


पत्रकारिता
पत्तरकारिता के बारे में उम्मीद है डॉल ब्लागस्पाट पर एक बेहद सुंदर लघु कविता मुझे मिली है इसे पढ़िए अगर आप पत्रकार हैं तो आपके समझ में बात आ जाएगी और नहीं हैं तो पत्रकारिता के बारे में अंदाजा लगाते रहिए


जो सोचता हूं,
वो कर नहीं पा रहा जो कर रहा हूं,
उसे समझ नहीं पा रहा जो समझ पा रहा हूं
वो कोई तसल्ली देने वाली चीज़ हर्गिज नहीं..
(पत्रकारिता के बारे में...दीपक)