Sunday, November 29, 2009

13 कुंतल की स्वर्ण प्रतिमा

सोनभद्र में 13 कुंतल शुद्ध सोने की बनी प्रतिमा का यूं ही पड़े रहना स्तब्ध कर देता है। पोलवा शिव पहाड़ी, सोनभद्र की खुदाई में निकली सोने की एक टन दो कुंतल, 80 किलो की कृष्ण की मूर्ति खुले में पड़ी है
मान्यतानुसार नगर ऊंटारी के राजा भवानी सिंह पोलवा की शिव पहाड़ी से सोने की मूर्ति निकलवाकर ले गये। वहां भव्य मंदिर का निर्माण कराकर उसे स्थापित करा दिया। मूर्ति के बाबत कोई प्रमाणिक साक्ष्य तो नहीं मिलता लेकिन गुप्तनाथ तिवारी की पुस्तक के अनुसार मूर्ति का निर्माण गोलकुण्डा हैदराबाद में हुआ था। कब और किसने कराया, इसका उल्लेख कहीं नहीं मिलता। माना जाता है भगवान कृष्ण की मूर्ति औरंगजेब के हाथ लगी। उसे खंडित करने के लिए हैदराबाद से दिल्ली ले जाया गया। मूर्ति की चमक दमक पर औरंगजेब की पुत्री शहजादी जेबुन्निसा इस कदर दीवानी हुई कि उसने सुन्दर मूर्ति को खंडित होने से बचा लिया। उसने शिवाजी को पत्र भेजकर मूर्ति प्रेम का इजहार किया था। मूर्ति पाने में असफल शिवाजी गुरु रामदास के पास गए और मूर्ति वापस लाने के प्रति जिज्ञासा व्यक्त की तो उन्होंने शिवाजी को आश्र्वस्त किया कि वह मूर्ति आपको मिल जाएगी। उत्तर पूर्वी काल के दौरान जब मराठों का इस क्षेत्र पर कब्जा हुआ तो उन्होंने औरंगजेब से झटक कर उस बहुमूल्य सोने की मूर्ति को उक्त पहाड़ी में छिपा दिया। समझा जाता है कि उसी समय से उक्त पहाड़ी को शिव पहाड़ी का नाम भी दे दिया गया हो। मूर्ति के बारे में दूसरी जनश्रुति है कि शिव पहाड़ी के पास ही सोन पहाड़ी भी है जहां पहले सोने की प्रचुरता थी। उस समय राजा बरियार शाह का शासन था। लोगों का मानना है राजा बरियार शाह ने ही सोने से उक्त मूर्ति का निर्माण कराया होगा। जो भी प्रामणिक तथ्य हो किंतु भगवान की अनोखी बहुमूल्य प्रतिमा का दर्शन करने के लिए प्रतिवर्ष देश विदेश से हजारों श्रद्धालु वंशीधर मंदिर ऊंटारी पहुंचते हैं। वंशीधर की स्वर्ण प्रतिमा के साथ राधा जी की अष्टधातु मूर्ति स्थापित की गई है। बीएचयू के प्रौद्योगिकी संस्थान के रसायन अभियांत्रिकी विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. के.के. श्रीवास्तव बताते हैं कि आदमी का शरीर लगभग 85 फीसदी पानी से बना होता है और सोने का घनत्व पानी की तुलना में 19 गुना अधिक होता है। ऐसे में साढ़े चार फीट की कृष्ण की प्रतिमा का ही वजन लगभग नौ कुंतल से अधिक हो जाता है। ठोस कमलदल व नाग का वजन मिलाकर अनुमानत: वजन 13 कुंतल के आसपास होना आश्चर्य की बात नहीं। मूर्ति के बारे में अभी तक विशेषज्ञ यह नहीं पता कर पाए हैं कि यह कब की बनी हुई है। हलांकि विशेषज्ञों का कहना है कि यह मूर्ति कृष्ण की सबी मूर्तियों से काफी भिन्न है और शायद दुनिया में अपने तरह की अकेली है। इसीलिए इसके संरक्षित करने की बेहद जरूरत है।

Friday, November 27, 2009

जामा मस्जिद पर मिलेगा दो दांत का बकरा


यह दृश्य दिल्ली के जामा मस्जद का है। ईद उल जुहा के हफ्ते भर पहले से ही यहां बकरे ही बकरे दिखते हैं। बुधवार को मैं यहां भूले भटके पहुंच गया। जामा मस्जिद को लेकर तमाम तरह की भ्रांतियां जानबूझ कर फैलाई गई हैं। लेकिन वहां जाकर पता चला कि एक ही देश में रहने वालों के बीच गलतफहमी है। इतना तो पता था कि बकरीद में बकरे हलाल होते हैं लेकिन जब दो दांत और चार दांत के बकरों के बेचे जाने की आवाज कान में पड़ी तो बस एक ही खयाल आया कि कितना कुछ हम बिना जाने ही किसी खास विषय पर पूर्वाग्रह बना लेते हैं। यह तस्वीर आप सबके नजर।

Wednesday, November 25, 2009

यह जाम किसके नाम???




ओबामा ने मनमोहन से कहा आपखा स्वागट है..बस मैनमोहन के आई से असुर धारा टपखने लगी और जाम छलक गया...

Monday, November 23, 2009

किस पर है नजर???

आजमगढ़ की पहचान दाऊद नहीं शकील है

मैं मीडिया पेशेवर हूं और आजमगढ़ का रहने वाला हूं। एक बार एक इंटरव्यू में एक संपादक महोदय ने मुझसे पूछा लिया कि आपको लगता नहीं कि आजमगढ़ के लोगों को शक की नजरों से देखा जाने लगा है। मैं उनका इशारा समझ गया था लेकिन फिर भी पूछ लिया-क्यों?? वह भी मेरा इशारा समझ गए लेकिन बात निकल चुकी थी, बोले-अबू सलेम, सिमी, आईएसआई, अंडरवल्रर्ड और कई आतंकियों के तार वहां जुड़ते हैं। मैंने कहा-यह मीडिया की देन है...अबू सलेम आजमगढ़ से था तो क्या अब आजमगढ़ को इनके नाम से जाना जाएगा? राहुल सांकृत्यायन, राही मासूम रजा, कैफी आजमी, शबाना आजमी इसी धरती से पैदा हुए तो इस धरती को उनके नाम से क्यों न जाना जाना चाहिए।
यह बात बीते साल भर होने को है। आज उसी संपादक के नेतृत्व में निकलने वाले अखबार में अंतिम पेज पर दो कालम में आजमगढ़ के शकील की खबर छपी है। खबर कुछ यूं है--
ÒÒ इंसान में अगर दृढ़ इच्छा शक्ति हो तो कुछ भी असंभव नहीं होता। इस बात को साबित किया है उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ जिले में निजामाबाद निवासी शकील ने। वह सरकारी सहायता के बिना चंदा मांगकर धन इकट्ठा कर पुलों के निर्माण में जुटे हुए हैं। एक रुपये चंदे से शुरू हुआ यह उनका यह जोश एक पुल का तोहफा जनता को दे चुका है। अभी आगे भी उनका इस अभियान को जारी रखने का इरादा है। शकील ने एक एक रुपए चंदा मांगकर क्षेत्र में पुल बनाने का काम शुरू किया और देखते ही देखते उनका सपना साकार हुआ। जनसहयोग से लगभग 65 लाख रुपए की लागत से क्षेत्र में पुल का निर्माण कर इसे जनता को समर्पित कर दिया गया। शकील इसके बाद भी रुके नहीं हैं और वह क्षेत्र में ही एक और पुल का निर्माण कराने में लग गए हैं। वह तीसरे पुल के निर्माण की अच्छा भी संजोए हुए हैं। जनमानस से जुड़ी उनकी इस महत्वाकांक्षी पुल योजना की खास बात यह है कि इसमें शासन प्रशासन और जन प्रतिनिधियो से सहयोग के नाम पर धेला भी न मिला और न ही लिया गया पर पुल का निर्माण हो गया। शकील ने बताया कि उन्हें पुल बनवाने का जुनून उस समय सवार हुआ जब लगभग छह वर्ष पूर्व आजमगढ़ जनपद में सरायमीर के पास के एक विद्यालय के बच्चे नाव से नदी पार कर स्कूल जा रहे थे कि अचानक तभी नाव पलट गई, जिसमें 11 च्च्चे तो बचा लिए गए परन्तु एक बच्चा डूब कर मर गया। एक बच्चे के डूबने की इस घटना ने शकील को झकझोर दिया और उसे नदी पर पुल बनाने का जुनून सवार हो गया। जब चंदे की रकम खत्म हो जाती तब निर्माण कार्य बंद हो जाता। ÓÓ
यह खबर ही उन संपादक महोदय या इस तरह के बेजा सवाल उठाने वालों का जवाब है और सवाल भी कि जब आतंकवाद का रिश्ता आजमगढ़ से जुड़ता है तो उसे लीड मार देते हैं...और उसे और सेंसेशनल-चटपटेदार बना देते हैं जबकि साकारात्मक खबर को खा जाते हैं। नाकारात्मक टीआरपीबाजी के मारे चैनल ही नहीं अखबार बेचारे भी हैं।

Sunday, November 22, 2009

अमेरिका का इमोशनल अत्याचार

बराक ओबामा की हालिया चीन यात्रा में उभरी अमेरिका-चीन की जुगलबंदी से भारत के रणनीतिकारों के होश फाख्ता हैं। यही कारण रहा कि हू जिंताओ और बराक ओबामा के संयुक्त बयान पर भारत में तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त हुई। हालांकि यह कोई नई बात नहीं है जब अमेरिका एक तरफ भारत को पुचकारता है तो दूसरी तरफ अपने हित साधने में उसे भारत की जरा भी परवाह नहींहोती। पाक प्रायोजित आतंकवाद का मामला इसका सबूत है। भारत पूरा जोर लगाकर पाकिस्तान की करतूतों का भंडा फोड़ता है, सबूत पर सबूत पेश करता रहता है लेकिन अमेरिका को वही करना होता है जो उसके हित में होता है, वह बिना कुछ बोले सैन्य मदद पाक की जेब में डाल देता है। जब भारत आपत्ति दर्ज कराता है तो वह कहता है कि हम दुनिया के दो शक्तिशाली लोकतांत्रिक देश हैं और हमारी रणनीतिक साझेदारी नैसर्गिक है, ऐसे में भारत को डरने की जरूरत नहीं है। वह भारत की स्वामीभक्ति सस्ते में हासिल करना चाहता है। यह इमोशनल अत्याचार नहींतो क्या है?
प्रधानमंत्री चार दिन के राजकीय यात्रा पर अमेरिका गए हुए हैं। भारत के रणनीतिकारों का कौशल देखिए...उन्हें इस बात पर ज्यादा गर्व है कि पीएम के भोज की व्यवस्था ओबामा परिवार खुद देख रहा है। टेंट और रसोइये का इंतजाम खुद अमेरिका की प्रथम महिला मिशेल ओबामा कर रही हैं। प्रधानमंत्री के शाकाहार के लिए अलग अलाव चढ़ेगा।
ओबामा अभी-अभी जापान और चीन में झुक कर आए हैं यहां भी थोड़ा झुक लेंगे...भारत को और क्या चाहिए? आतंकवाद का मुद्दा, व्यापार का मुद्दा, परमाणु अप्रसार का मुद्दा...ईरान-भारत-पाकिस्तान गैस पाइप लाइन का मुद्दा...ये सब तो बातें हैं...इन बातों का क्या... होती रहेंगी। विमान भर कर गए रणनीतिकार अमेरिका के डिनर के जायके से फूल जाएंगे। भारत आकर कहेंगे...दोनों नेताओं में सभी मुद्दों पर झूम कर बातचीत हुई। पर उनसे पूछिए कि इस झप्पी का नतीजा क्या रहा तो वे डिनर में पेश किए गए मुगलई चिकन की तारीफ करेंगे और बताएंगे कि वह खासकर फला खानसामे से खासकर भारत की मेहमानवाजी में बनवाए गए थे...बड़ा जायकेदार डिनर था, ओबामा तो ऐसे बिछे कि लगा ही नहीं वह महाशक्ति के नेता हैं।
माननीय प्रधानमंत्री जी देश को बताएंगे कि परमाणु करार पर अमेरिका को हमने पटरी पर ला दिया है। व्यापार पर द्विपक्षीय सहयोग की बात हुई है और आतंकवाद पर अमेरिका कड़ा रुख अपनाने का वादा किया है। हालांकि यह बात गोल कर जाएंगे कि अमेरिका ने परमाणु करार में अप्रसार का रोड़ा डाल दिया...कि पाकिस्तान की जेब गरम न करने का कोई वादा नहीं किया...कि देश की तरक्की में मील का पत्थर साबित होने वाली भारत-पाक-ईरान गैस पाइप लाइन में टांग अड़ाने की उसने जिद नहीं छोड़ी है। और इस प्रकार पीएम की अमेरिका यात्रा आशातीत सफलताओं के साथ संपन्न हो जाएगी। यह इमोशनल अत्याचार नहीं तो क्या है?

Monday, October 12, 2009

जनता की गाढ़ी कमाई दिल्ली खा रही है?

किश्त-एक


कामनवेल्थ गेम्स 2010 दिल्लीखर्च-2264 करोड़ रुपए (22 अरब 64 करोड़)
झारखंड का कुल बजट 8000 करोड़ रुपए (80 अरब रुपए)

दिल्ली मेट्रो रेल बजट -1000 करोड़ रुपए (10 अरब रुपए)

देश की 85 फीसदी जनता महज जी पाने लायक परिस्थितयों में रहकर खेती-किसानी से लेकर उद्योगों, फैक्ट्रियों, कारखानों, खदानों, निर्माण कार्यों में लगी हुई है। यह आबादी या तो किसान है या मजदूर है या छोटे-मोटे व्यवसाय या सेवा क्षेत्र में लगी हुई है। इस पूरी आबादी के लिए न तो ठीक से दो जून की रोटी मयस्सर है, न इनके सेहत और शिक्षा का कोई प्रबंध है। बेहद नारकीय जीवन जीते हुए यह आबादी जुटी हुई है देश को आगे बढ़ाने में और बाकी 15 फीसदी उसकी गाढ़ी कमाई का कैसे सदुपयोग कर रहे हैं यह कामनवेल्थ गेम्स (राष्ट्र मंडल खेलों) पर होने वाले खर्चे से पता चलता है। यह खेल देश का नाम रौशन करने के बहाने हो रहा है। इसमें सभी को रेवड़ी मिलनी है। कंपनियों को, ठेकेदारों को, विग्यापन वालों को, नेताओं को, उच्च वर्ग को। पैसे को पानी की तरह बहाने पर सभी सहमत हैं।
लेकिन कालाहांडी, छत्तीसगढ़, कंधमाल, लालगढ़, पलामू, झाबुआ या फिर कांदिवली, दादर (मुंबई) व शादीपुर, महरौली (दिल्ली) जैसे इलाकों में रहने वालों के लिए अस्पताल, स्कूल, शुद्ध पानी, बिजली, सुरक्षा और सम्मान की जिंदगी के लिए सरकारी खजाने से फूटी कौड़ी भी निकलने में सालों बीत जाएंगे! यह पूरी आबादी जीने की न्यूनतम शर्तें भी खो चुकी है। पूरी आबादी को हाशिए पर डाल दिया गया है। उन्हें सिर्फ अधिकार है तो जानवरों की तरह लगातार खटने का और इसके बदले महज जी सकने भर का वेतन। ऐसे में कामनवेल्थ गेम्स पर पानी की तरह पैसा बहाने का कोई तर्क समझ में नहीं आता है। क्या आपको आता है?

Sunday, October 11, 2009

देश को चमकाने वाले हाथ बेबस और निहत्थे


फरीदाबाद के सेक्टर-24 इंडस्ट्रियल एरिया स्थित कंपनी का लेंटर गिरने से घायल मजदूर बादशाह खान अस्पताल में उपचार करवाते हुए। देश में मजदूरों की हालत यही है। जो सूई से लेकर गगनचुंबी इमारतें बनाते हैं उनके जीने का हक खत्म हो चुका है। अब वे दास भर रह गए हैं। मजदूरों की यूनियनें धाराशायी हैं। धंधेबाजों का घुन उन्हें खोखला कर चुका है। मजदूर भी संगठित नहीं हो रहे हैं। भयंकर उलटाव का दौर है। ऐसे समय में मजदूरों का यही हश्र होने वाला है। इन उठाईगीर सरकारों से कोई उम्मीद बांधना नादानी ही है।
रविवार को एक कंपनी में निर्माणाधीन लेंटर गिरने से एक मजदूर की मौत हो गई, जबकि 12 घायल हो गए। घायलों को बादशाह खान अस्पताल में भर्ती करवाया गया है। घायल मजदूरों की हालत खतरे से बाहर बताई जा रही है। जानकारी के अनुसार सेक्टर-24 इंडस्ट्रियल एरिया स्थित मेल्को स्टील एंड वायर कंपनी में लोहे के तार कटिंग करने का कार्य होता है। कंपनी में निर्माण कार्य चल रहा था। रविवार सुबह 10 बजे कंपनी में लेंटर डालने का कार्य शुरू हुआ। कंपनी प्रबंधन ने रामसहाय ठेकेदार को इसका ठेका दे रखा था मगर 12 बजे जितना लेंटर डल चुका था, वह भरभरा कर गिर गया। लेंटर डालने के कार्य में करीब 20 से 25 मजदूर लगे थे। इनमें कुछ शटरिंग व अन्य लेंटर डालने में लगे थे। शटरिंग वाले मजदूर नीचे लगी बल्लियों को नियंत्रित करने में लगे हुए थे। ऐसे में लेंटर गिरने से वे उसके नीचे दब गए। आसपास की फैक्ट्रियों में काम कर रहे कर्मचारियों की मदद से लेंटर के नीचे दबे मजदूरों को निकाल कर अस्पताल पहुंचाया गया। इसकी खबर मिलते ही नगर निगम के आयुक्त सीआर राणा, एसडीएम मुकुल कुमार व डीसीपी एनआईटी प्रवीण महता दल-बल सहित मौके पर पहुंचे। मलबे में दबे मजदूरों को निकाला गया। इनमें सेक्टर-नौ निवासी उमान, एसी नगर निवासी विगन राम, एनएच पांच निवासी किशन, एनएच तीन निवासी राम सहाय, एसी नगर निवासी मुकेश, सारन निवासी मुख्तयार, सेक्टर-नौ निवासी पप्पू, एसी नगर निवासी हरीश, एसी नगर निवासी रामकुमार, रणजीत, एनएच तीन निवासी हरी व जवाहर कालोनी निवासी भोला हैं।शाम को मलबे के नीचे एक और मजदूर को निकाला गया। उसकी मलबे में दबने से मौत हो गई थी। मृतक मजदूर का नाम श्री बताया जा रहा है। पुलिस ने उसके शव को पोस्टमार्टम के लिए बादशाह खान अस्पताल के शवगृह में रखवा दिया है। खबर लिखे जाने तक पुलिस ने मामला दर्ज नहीं किया था। एसीपी मुजेसर तेजवीर सिंह ने बताया कि पुलिस व निगम के अधिकारी मामले की जांच में जुटे हैं। इस मामले में लापरवाही बरतने वाले के खिलाफ कानूनी कार्रवाई का आश्वासन तो जरूर दिया गया लेकिन अभी तक किसी पर कार्रवाई नहीं की गई है। देश में लगातार बढ़ रही दुर्घटनाओं में मजदूर मारे जा रहे हैं लेकिन इस पर पूरा मीडिया और लोकतंत्र के रक्षक चुप हैं। आखिर क्यों। क्योंकि पूंजीपतियों के टुकड़े पर पलने वाली लोकतांत्रिक सरकारें अपने आकाओं को ही बचाने में लगी हुई है।

Monday, September 28, 2009

गोरक्षा के नाम पर देश में छेड़ेगा संघ संग्राम

- शंखनाद व वैदिक मंत्रोच्चारण के बीच संतों ने खींचा विश्व मंगल गो ग्राम यात्रा का रथ- गायत्री व कामधेनु यज्ञ से शुरू हुआ तीन दिवसीय उद्घाटन समारोह
कुरुक्षेत्र, २८ सितंबर :
संघ देश में साम्प्रदायिक विद्वेश घोलने का एक और मौका तलाशने जा रहा है। उसने सोमवार को विजय दशमी के पर्व पर शंखनाद और वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ कुरुक्षेत्र में रथ खींच कर गो ग्राम यात्रा का शुभारंभ किया। 108 दिन में यह यात्रा दो लाख गांवों से होती हुई करोड़ों लोगों को गोरक्षा का संकल्प दिलाएगी। 20 हजार किलोमीटर के सफर में देश के बड़े संत व नामचीन हस्तियां यात्रा में सम्मिलित होंगी। यात्रा के दौरान गोहत्या पर प्रतिबंध व गाय को राष्टï्रीय प्राणी घोषित करवाने की मांग पर 50 करोड़ लोगों के हस्ताक्षर करवाने का लक्ष्य रखा गया है। गायत्री और कामधेनु यज्ञ में आहुतियों के साथ विश्व मंगल गो ग्राम यात्रा का तीन दिवसीय उद्घाटन समारोह सोमवार को वैदिक रीति से शुरू हुआ। यात्रा के सूत्रधार गोकर्ण पीठ के स्वामी राघेश्वर भारती, राष्टï्रीय स्वयं सेवक संघ के सर कार्यवाह भैया जी जोशी, यात्रा के राष्टï्रीय समन्वयक डा. एचआर नागेंद्र व बड़ी संख्या गो भक्तों ने आहुति डाल कर गो रक्षा का संकल्प लिया। स्वामी राघेश्वर भारती ने कहा कि यह संग्राम धर्म के लिए है। विजय दशमी के पर्व पर शुरू इस अभियान में विजय निश्चित ही प्राप्त होगी। यह भूख से समृद्धि की ओर महान अभियान है। लोगों के त्याग और मेहनत से एक नया स्वर्ण काल शुरू होगा। इससे गऊ व भारतीय संस्कृति का गौरव पूरे विश्व में स्थापित होगा। स्वामी राघेश्वर भारती ने कहा कि भावी पीढ़ी की समृद्धि और इंडिया को फिर से भारत बनाने में इस अभियान की महत्वपूर्ण भूमिका होगी। राष्टï्रीय स्वयं सेवक संघ के सर कार्यवाह भैया जी जोशी ने इस अवसर पर कहा कि इस यात्रा के साथ स्वतंत्रता का दूसरा संग्राम शुरू होगा। इससे भारत ही नहीं पूरे विश्व का मंगल होगा। यह परिवर्तन का चक्र प्रारंभ हुआ है। यात्रा के राष्टï्रीय समन्वयक एवं नासा के पूर्व वैज्ञानिक और स्वामी विवेकानंद योग विश्वविद्यालय के संस्थापक कुलपति डा. एचआर नागेंद्र ने कहा कि देश में गाय आधारित जीवन पद्धति की नई शुरुआत होगी। यह संस्कृति के कल्याण का संकल्प है। इसके माध्यम से गांव की ओर जाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। एचआर नागेंद्र ने कहा कि गायों की उपयोगिता व उनसे स्वावलंबन की अवधारणा को रचनात्मक आधार देने के लिए गो वंश पर अनुसंधान किए जा रहे हैं। इससे कितना विश्व मंगल होगा यह तो संघ की मानसिकता से ही पता चल जाता है।

आरएसएस का असलहा प्रेम



भोपाल : राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के कार्यकर्ता संघ की स्थापना दिवस पर शस्त्र का प्रदशर्न करते हुए? लाठी से शुरुआत करते हुए संघ आज मशीन गन तक पहुंच गया है। हालांकि संगठन के पास अघोषित हथियारों में गैस सिलेंडर को बम के रूप में इस्तेमाल करना भी आता है।

Sunday, September 27, 2009

चीन ने कहा, जातीय मसले हल करना दुष्कर होगा

बीजिंग, 27 सितंबर : चीनी सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी ने आज कहा कि चीन को उसके अल्पसंख्यक समूहों के जीवन में सुधार लाने के लिए अधिक कोशिशें करने की जरूरत है। अधिकारी ने इस बात के बहुत कम संकेत दिए कि बीजिंग हाल ही में हुए जातीय संघर्ष के बाद अपनी नीति पर दोबारा विचार करने की तैयारी कर रहा है। चीन के जातीय मामलों के आयोग के निदेशक यांग जिंग ने कहा कि चीन इस बात से अच्छी तरह से अवगत है कि देश के जातीय समूहों के बीच आर्थिक तथा सांस्कृतिक विकास में फर्क लंबे समय तक बना रहेगा। यांग ने संवाददाताओं से कहा, चीन में जातीय मसले सुलझाने में लंबा समय लगेगा और यह दुष्कर

Saturday, September 26, 2009

गरीबी का परिहास


Shrawasti : Congress General Secretary Rahul Gandhi having his dinner while spending a night in the house of gram pradhan Chhedi Pasi (L) in a Dalit hamlet in Shrawasti district of Uttar Pradesh on Wednesday.

Shrawasti : Congress General Secretary Rahul Gandhi in a class room at a school in a Dalit hamlet in Shrawasti district of Uttar Pradesh on Wednesday.

गरीबी का परिहास



SEPTEMBER 25, 2009 - Shrawasti : Congress General Secretary Rahul Gandhi inspects NREGA works in a Dalit hamlet in Shrawasti district of Uttar Pradesh.

Friday, September 25, 2009

अब आई सुप्रीम कोर्ट को मजदूरों की सुध

श्रम विवादों में यूनियनों के पक्ष को अहम बताया
नई दिल्ली, एजेंसी : एक जमाने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने श्रम विवाद मामलों में मजदूरों के पक्ष में निणर्य दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि श्रम विवाद मामलों में फैसला सुनाए जाने से पहले अदालतों में आवश्यक रूप से पीडि़त श्रमिकों या मजदूर संगठनों के पक्ष को सुना जाना चाहिए अन्यथा यह प्राकृतिक न्याय के सिद्धांत का उल्लंघन होगा।
इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने हड़तालों से लेकर मजदूरों के हकों के खिलाफ कई बड़े बड़े निर्णय दिए हैं। यहां तक यूनियन की गतिविधि पर भी टिप्पणी की थी। इसलिए मजदूरों को सुप्रीम कोर्ट से आस्था उठने लगी थी। हालांकि इस निर्णय से भी मजदूरों के श्रम विवादों में कोई खास उम्मीद नहीं बंधती है।
शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट में न्यायमूर्ति मार्कण्डेय काटजु और न्यायमूर्ति अशोक कुमार गांगुली की पीठ ने कहा कानून श्रम कानून का उद्देश्य श्रमिकों को सुविधा प्रदान करना है। इसलिए सामान्य तौर पर श्रम कानून के तहत सभी मामलों में श्रमिकों या कम से कम उनका प्रतिनिधित्व करने वालों या मजदूर संगठनों को एक पक्ष बनाया जाना चाहिए।अदालत ने त्रावणकोर स्थित कर्मचारी राज्य बीमा (ईएसआई) अदालत को कुछ मजदूरों का पक्ष सुनने का निर्देश दिया जिन्हें फर्टिलाइजर केमिकल त्रावणकोर लिमिटेड ने चिकित्सा बीमा सुविधा प्रदान करने से इंकार कर दिया था। तर्क यह दिया गया था कि इन श्रमिकों की योग्यता इस योजना का लाभ पाने के लिए पर्याप्त नहीं है। इससे पहले, इस मामले में ईएसआई अदालत ने विवाद पर कोई निर्णय जारी नहीं किया था और केरल हाईकोर्ट ने कंपनी से श्रमिक को ईएसआई सुविधा उपलब्ध कराने का निर्देश दिया था। यह श्रमिक गोदाम में सामान ढोने का काम करते थे। इस मामले की सुनवाई के दौरान न तो ईएसआई अदालत और न ही हाईकोर्ट ने पीडि़त श्रमिकों की जांच परख की।
ऐसा नहीं कि यह मामला पहली बार हुआ है। जिन मजदूरों की कमाई से देश के उद्योगपति सुपर मुनाफा निचोड़ रहे हैं उनके बुनियादी हकों को मारने में देश की न्यायपालिका पूंजीपतियों के कंधे से कंधा मिलाकर काम किया है।

Wednesday, September 23, 2009

भारत को 4.3 अरब डॉलर का कर्ज़

क्या यह कर्ज किसानों को डूबने से बचा पाएगा? बेरोजगारों को नौकरी दिला पाएगा? मजदूरों की गलाजत भरी जिंदगी में सुधार ला पाएगा?
विश्व बैंक ने भारत को 4.3 अरब डॉलर का कर्ज़ देने का एलान किया है. इसमें से दो अरब डॉलर भारत के सरकारी बैंकों को सुदृढ़ करने के लिए दिया गया है। जाहिर सी बात है ये बैंक केवल देश के नेताओं और उद्योगपतियों की सेवा में लगे हुए हैं और अंततः यह पैसा घूम फिर कर उन्हीं की सेवा में लगेगा। जनता फिर भी कंगाल ही रहेगी। सोचना होगा कि यह कैसी लोकतांत्रिक प्रक्रिया है?

विश्व बैंक का अंनुमान है कि 2009 भारत की आर्थिक रफ़्तार पिछले दो सालों के मुक़ाबले धीमी होगी और वृद्धि की दर 5.5 प्रतिशत पर आ जाएगी. दो साल पहले ये दर 10 प्रतिशत के आसपास थी। विश्व बैंक के भारत निदेशक रॉबर्टो ज़ागा ने कहा है, ``भारत को मदद करने का ये एक अहम समय है।’’ यह विकास दर यहां कृषि में नहीं है बीमा सेक्टर, बैंकिंग सेक्टर, मैन्यूफैक्चरिंग सेक्टर, आटोमोबाईल, कम्यूनिकेशन सेक्टर आदि के लिए है। यह हाशिए पर जा चुकी दो तिहाई आबादी के लिए सिर्फ लालीपाप भर है। विश्व बैंक की हमेशा से नीति रही है इस हाथ दे उस हाथ ले। सभी जानते हैं कि अमेरिका के इशारे पर विश्वबैंक काम करता है। एक तरफ विश्व बैंक कर्ज देगा तो दूसरी तरफ इन्हीं पैसों से अमेरिका भारत को हथियार बेचने का दबाव डालेगा। वैसे भी भारत एशिया में सबसे ज्यादा हथियारों पर खर्च करने वाला देश है। विमान वाहक पोत गोर्शकोव की कीमत 1.82 अरब डालर (करीब 89 अरब रुपए) पर आ पहुंची है। क्या इस बात का अंदाजा लगाना मुश्किल है कि इस धन से देश में एम्स जैसे कितने अस्पताल बनाए जा सकते हैं या कितने तकनीकी संस्थान खोले जा सकते हैं? या कितने गांवों में बिजली और पानी की बुनियादी सुविधा मुहैया कराई जा सकती थी?
कहा जा रहा है कि इस कर्ज़ का इस्तेमाल मुख्य रूप से आधारभूत ढांचे को बेहतर करने वाले कार्यक्रमों में होगा और साथ ही उन कंपनियों की मदद के लिए भी होगा जिन्हें कर्ज़ की ज़रूरत है। लेकिन यह पहले से तय है कि सबसे ज्यादा बुरे दिन देख रहे किसानों को आखिर कफनखसोट साहुकार ही नसीब होंगे।
रॉबर्टो ज़ागा का कहना था कि भारत के लिए आर्थिक मंदी का सबसे बुरा दौर शायद पीछे छूट गया हो लेकिन हालात में जो सुधार हो रहे हैं वो कितने स्थाई हैं उस बारे में कुछ कहना मुश्किल है।
ये कर्ज़ भारत के अनुरोध पर जारी किया गया है। भारत सरकार का कहना था कि उन्हें आर्थिक मंदी से उबरने के लिए और मदद की ज़रूरत है। बैंकिंग क्षेत्र के लिए जो दो अरब डॉलर की मदद है उससे बैंकों को पूंजी की सुरक्षा और एक ढाल प्रदान करने की बात है। बैंकिंग सेक्टर जो सुपर प्राफिट निचोड़ रहा है उसमें भी उसे कर्ज लेकर झोली भरना कहां तक जायज है?
हालांकि बात तो है कि इस कर्ज़ में से एक अरब डॉलर भारत की बिजली प्रवाह प्रणाली को बेहतर करने में लगाया जाएगा लेकिन जो मंदी से सबसे ज्यादा प्रभावित हैं उनके नाम पर लिया गया कर्ज रूलिंग क्लास सरेआम अपने हित में इस्तेमाल करेगा।
विश्व बैंक ने इसी तरह के कर्ज़ वियतनाम, हंगरी, लाटविया और नेपाल के लिए भी जारी किया है।
यानी मंदी भी भारतीय पूंजीपतियों के लिए सोने की बरसात ले कर आई है।

Sunday, September 20, 2009

46 per cent Indian children suffer from malnutrition

19 sep 2009, agency
Despite India's recent economic boom, at least 46 per cent of its children up to the age of three still suffer from malnutrition, making the country home to a third of the world's malnourished children, a study said on Thursday.
Noting that the country is an 'economic powerhouse but a nutritional weakling', the report by the British-based Institute of Development Studies, which incorporated papers by more than 20 analysts from India, said, "At least 46 per cent of children up to the age of three in India still suffer from malnutrition."

India will not meet the UN Millennium Development Goal

"It's the contrast between India's fantastic economic growth and its persistent malnutrition which is so shocking," Lawrence Haddad, director of the IDS, told The Times.
The United Nations defines malnutrition as a state in which an individual can no longer maintain natural bodily capacities such as growth, pregnancy, lactation, learning abilities, physical work and resisting and recovering from disease.
The report said India will not meet the United Nations Millennium Development Goal, of halving its number of hungry citizens till 2043, though it had committed in 2001 to reach it by 2015.

6,000 children die every day in India
The report also highlighted the government's failure to improve basic living standards for most Indians despite its unprecedented economic growth since 2004.
"The boom has enriched a consumer class of about 5 crore people, but an estimated 88 crore people still live on less than $2 a day, many of them in conditions worse than those found in sub-Saharan Africa," it said.
It said that an average of 6,000 children died every day in India; 2,000 to 3,000 of them from malnutrition.

Government officials don't deliver
The report said that one of the main problems was that millions of Indians were unable to hold government officials to account for delivering government feeding programmes, with bureaucrats frequently excluded large groups of individuals -- including those from the lower castes and women -- from government initiatives.
Michael Anderson, the head of Department of International Development in India, which will spend 500 million pounds on health and nutrition in India between 2008 and 2012, said, "There is no shortage of ideas about what to do to tackle malnutrition. But leadership from the top and joint action across the government are needed to turn these ideas into practical solutions. The challenge is urgent: the lives of millions of children depend on it."

Wednesday, September 16, 2009

Jai Ho!!! capitalist development


(this photo can be enlarged)
Farmers spray milk on a field in Ciney, Belgium, Wednesday, Sept. 16, 2009. Farmers in Belgium dumped 3 million liters (790,000 gallons) of fresh milk on a field to underscore that European producers can't make a living from current rock-bottom milk prices.
This is future capitalism mode of production. It is just an example that how the market grows. one hand there is no milk for millions of people and other hand millions of milk is getting destr0yed. Same things happen with Weat, rice, oil, ghee, sugar etc. In Atal bihari govt. there were destroyed several thousands ton wheat in hind mahasagar. In this market economy only those can sevive who have paper or mettal currency-others are useless. It should not be get surprise if in future rich people amend in constitution for erasing two third people of globe because ruling class feel no need of them.

अंधेरे में- मुक्तिबोध

स्वप्न के भीतर स्वप्न,
विचारधारा के भीतर और एक अन्य सघन विचारधारा प्रच्छन!!
कथ्य के भीतर एक अनुरोधी विरुद्ध विपरीत, नेपथ्य संगीत!!
मस्तिष्क के भीतर एक मस्तिष्क
उसके भी अन्दर एक और कक्ष
कक्ष के भीतर
एक गुप्त प्रकोष्ठ और
कोठे के साँवले गुहान्धकार में मजबूत...सन्दूक़ दृढ़,
भारी-भरकम और उस सन्दूक़ भीतर कोई बन्द है यक्ष
या कि ओरांगउटांग
हाय अरे! डर यह है... न ओरांग...उटांग कहीं छूट जाय,
कहीं प्रत्यक्ष न यक्ष हो।
क़रीने से सजे हुए संस्कृत...प्रभामय
अध्ययन-गृह में बहस उठ खड़ी जब होती है--
विवाद में हिस्सा लेता हुआ मैं सुनता हूँ
ध्यान से अपने ही शब्दों का नाद, प्रवाह
और पाता हूँ अक्समात्
स्वयं के स्वर में ओरांगउटांग की बौखलाती
हुंकृति ध्वनियाँ एकाएक भयभीत पाता हूँ
पसीने से सिंचित अपना यह नग्न मन!
हाय-हाय औऱ न जान ले कि नग्न और
विद्रूप असत्य शक्ति का प्रतिरूप प्राकृत औरांग...उटांग
यह मुझमें छिपा हुआ है।
स्वयं की ग्रीवा पर फेरता हूँ हाथ कि करता हूँ महसूस
एकाएक गरदन पर उगी हुई सघन अयाल
और शब्दों पर उगे हुए बाल तथा वाक्यों में ओरांग...उटांग के
बढ़े हुए नाख़ून!!
दीखती है सहसा अपनी ही गुच्छेदार मूँछ
जो कि बनती है कविता
अपने ही बड़े-बड़े दाँत जो कि बनते है
तर्क और दीखता है प्रत्यक्ष बौना यह भाल और
झुका हुआ माथा
जाता हूँ चौंक मैं निज से अपनी ही बालदार सज से
कपाल की धज से।
और, मैं विद्रूप वेदना से ग्रस्त हो करता हूँ
धड़ से बन्द वह सन्दूक़ करता हूँ
महसूस हाथ में पिस्तौल बन्दूक़!!
अगर कहीं पेटी वह खुल जाए, ओरांगउटांग
यदि उसमें से उठ पड़े, धाँय धाँय गोली दागी जाएगी।
रक्ताल...फैला हुआ सब ओर ओरांगउटांग का लाल-लाल ख़ून,
तत्काल... ताला लगा देता हूँ में पेटी का बन्द है सन्दूक़!!
अब इस प्रकोष्ठ के बाहस आ अनेक कमरों को
पार करता हुआ
संस्कृत प्रभामय अध्ययन-गृह में अदृश्य
रूप से प्रवेश कर चली हुई बहस में भाग ले रहा हूँ!!
सोचता हूँ--विवाद में ग्रस्त कईं लोग
कईं तल
सत्य के बहाने स्वयं को चाहते है प्रस्थापित करना।
अहं को, तथ्य के बहाने।
मेरी जीभ एकाएक ताल से चिपकती अक??
आरयुक्त-सी होती है और मेरी आँखें
उन बहस करनेवालों के कपड़ों में छिपी हुई
सघन रहस्यमय लम्बी पूँछ देखती!!
और मैं सोचता हूँ... कैसे सत्य हैं-- ढाँक रखना चाहते हैं बड़े-बड़े
नाख़ून!!
किसके लिए हैं वे बाघनख!! कौन अभागा वह!!

खुफिया सेवा पर प्रतिवर्ष 3 खरब रुपये खर्च करता है अमेरिका

वाशिंगटन, एजेंसी : अमेरिका की शीर्ष खुफिया एजेंसी की एक रिपोर्ट के मुताबिक रूस, चीन, उत्तर कोरिया और ईरान ऐसे देश हैं जो अपने पारंपरिक व नए तरीकों से अमेरिका को चुनौती देने की ताकत रखते हैं। खुफिया सेवा के लिए अमेरिका प्रतिवर्ष करीब 75 अरब डालर (करीब 3 खरब रुपये) खर्च करता है।
2009 के लिए राष्ट्रीय खुफिया रणनीति जारी करते हुए राष्ट्रीय खुफिया एजेंसी के निदेशक डेनिस ब्लेयर ने कहा कि 'अमेरिका के लिए पश्चिम एशिया और उससे बाहर के देशों की सुरक्षा बनाए रखना खासा चुनौतीपूर्ण साबित हो रहा है। चीन और रूस दोनों साइबर जगत में बहुत आक्रामक हैं।

A butterfly sucking nectar from a flower at a garden in New Delhi

Monday, September 14, 2009

In Bihar even Maoists are played by casteism




Mon, Sep 14 04:10 PMGaya (Bihar), Sep 14 (ANI): Rebels from a Maoist group in Bihar recently quit and joined another group after they alleged that the former group had high caste ideology.Defected activists of the Communist Party India (Maoist), which operates in and around Bihar and Jharkhand, allege that the group had drifted away from communist ideology and they never worked for the betterment of farmers and peasants.Caste issues had created a rift among the cadres, which prompted the activists to defect to the Sashastra People's Morcha (Armed People's Front), another Maoist group."We have come out to fight against the CPI (Maoist). They have caste issues inside the group. They are also against the locals hence we want to support us in return," said Paramjeet, a commander of the front.However, the (Maoist) said that many of the renegades lacked the revolutionary spirit."These men are not revolutionaries and that's the reason they keep commenting like this. They get drifted to other parties and carry out such incidents," said Advani, a leader of the CPI (Maoist).Police are apprehensive that the law and order situation in the region could worsen if the new group starts revenge killing, inviting retaliation after the split.Maoists have formally been labelled as a terrorist group by central government, which gives security forces more enforcement powers. (ANI)

Sunday, September 13, 2009

बांध परियोजना के लिए 12.7 लाख लोग विस्थापित

बीजिंग, 13 सितंबर : चीन ने यांग्तजी नदी पर विवादास्पद बांध थ्री गारजेज बांध के निर्माण के लिए 12.7 लाख लोगों को अन्यंत्र भेजा है। सरकारी मीडिया ने थ्री गोरजेस परियोजना निर्माण समिति के कार्यालय में उपप्रमुख लू चुन के हवाले से यह जानकारी दी है। उन्होंने कहा है कि लोगों को दूसरी जगह बसाने के काम को 17 साल में लगभग पूरा कर लिया गया है। लू ने कहा कि 12.7 लाख लोगों के दूसरी जगह बसाने का काम 12 शहरों से जुड़ा हुआ है। चीनी अधिकारियों ने इससे पहले संकेत दिया था कि इस विवादास्पद परियोजना के लिए 14 लाख लोगों को विस्थापित होना पड़ सकता है। इस बीच।,632 औद्योगिक एवं खनन फर्मों को बंद कर दिया गया है या स्थानांतरित कर दिया गया है।

Friday, September 4, 2009

अध्यापक के नाम अब्राहम लिंकन की पाती

यह चिट्ठी अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति अब्राहम ने अपने बेटे के शिक्षक के लिखी थी लेकिन तबसे लेकर आज तक इसका दुनिया की भाषाओं में अनुवाद होकर स्वतः ही प्रचारित- प्रसारित होता गया।
शिक्षक दिवस के अवसर पर आज भी यह प्रासंगिक है। गौर फरमाएं---
हे अध्यापक!
मैं जानता हूँ कि उसे सीखना होगा
कि दुनिया में सभी लोग न्यायप्रिय नहीं होते,
सभी लोग सच्चे नहीं होते
किंतु उसे यह भी सिखाएं कि जहां
एक बदमाश होता है वहां एक नायक भी होता है
उसे यह भी बताएं कि
हर स्वार्थी नेता के जवाब में एक समर्पित नेता भी होता है
उसे बताइए कि जहाँ एक दुश्मन होता है वहां
एक दोस्त भी होता है
अगर आप कर सकते हैं
तो उसे ईर्ष्या से बाहर निकालें
खामोश हसीं का रहस्य बताएं
जल्दी यह सीखने दें कि गुंडई करने वाले
बहुत जल्दी चरण स्पर्श करते हैं
अगर पढ़ा सकें तो उसे किताबों के आश्चर्य के बारे में पढ़ाएं
उसे इतना समय भी दें कि
वह आसमान में उड़ती चिड़िया के धूप में
उड़ती मधुमक्खियों के और हरे पर्वतों पर खिले फूलों
के रहस्यों के बारे में सोच सके
उसे स्कूल में यह भी सिखाएं कि
नकल करने से ज्यादा सम्मानजनक फ़ेल हो जाना है
उसे अपने विचारों में विश्वास करना सिखाएं तब भी
जब सब उसे ग़लत बताएं
उसे विनम्र लोगों से विनम्र रहना
और कठोर व्यक्ति से कठोर व्यवहार करना सिखाएं
मेरे बेटे को ऐसी ताकत दें कि
वह उस भीड़ का हिस्सा न बने जहां
हर कोई खेमे में शामिल होने में लगा है
उसे सिखाएं कि वह सब की सुने लेकिन
उसे यह भी बताएं कि
वह जो कुछ भी सुने
उसे सच्चाई की छन्नी पर छाने और
उसके बाद जो अच्छी चीज बचे उसे ही ग्रहण करे
अगर आप सिखा सकतें हैं तो उसे सिखाएं कि
जब वह दुखी हो तो रोए नहीं
उसे सिखाएं कि आंसू आना शर्म की बात नहीं
उसे सिखाएं कि निंदकों का कैसे मजाक उडाया जाए
और ज्यादा मिठास से कैसे सावधान रहा जाए
उसे बताएं कि अपनी बुद्धि पर घमंड करने से बचे लेकिन
अपने ह्रदय और आत्मा को किसी कीमत पर न बेचे
उसे सिखाएं कि
एक चीखती भीड़ के आगे अपने कान बंद कर ले
और अगर वह अपने को सही समझता है तो
उठ कर लड़े
आप उसे कुछ सिखाना चाहते हैं तो उससे विनम्रता से पेश आएं लेकिन
उसे छाती से न लगाए रखें क्योंकि
आग में ही तप कर लोहा मजबूत बनता है
उसमे साहस आने दें,
उसे अधीर बनने दें,
उसमे बहादुर बनने का धैर्य आने दें
उसे सिखाएं कि वह अपने में गहरा विश्वास रखे
क्योंकि तभी वह मानव जाति में गहरा विश्वास रखेगा
यह एक बड़ी फरमाइश है ...पर देखिये
आप क्या कर सकते हैं क्योंकि यह छोटा बच्चा मेरा बेटा है !
अब्राहम लिंकन (भूतपूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति)

Wednesday, September 2, 2009

Tuesday, September 1, 2009

Saturday, August 29, 2009

Monday, August 24, 2009

ये किसका लहू है कौन मरा

ऐ रहबरे-मुल्को-कौम बता
आँखें तो उठा नज़रें तो मिला
कुछ हम भी सुने हमको भी बता
ये किसका लहू है कौन मरा…
धरती की सुलगती छाती पर
बेचैन शरारे पूछते हैं
हम लोग जिन्हें अपना न सके
वे खून के धारे पूछते हैं
सड़कों की जुबां चिल्लाती है
सागर के किनारे पूछते है
ये किसका लहू है कौन मरा…
ऐ अज़्मे-फना देने वालो
पैगामे-वफ़ा देने वालो
अब आग से क्यूँ कतराते हो
मौजों को हवा देने वालो
तूफ़ान से अब क्यूँ डरते हो
शोलों को हवा देने वालो
क्या भूल गए अपना नारा
ये किसका लहू है कौन मरा
हम ठान चुके हैं अब जी में
हर जालिम से टकरायेंगे
तुम समझौते की आस रखो
हम आगे बढ़ते जायेंगे
हम मंजिले-आज़ादी की कसम
हर मंजिल पे दोहराएँगे
ये किसका लहू है कौन मरा…
–साहिर लुधियानवी(1946 के नौसेना विद्रोह के समय लिखी नज़्म)

Sunday, August 23, 2009

इंदिरा-राजीव के नाम हैं सैकड़ों परियोजनाएं

बुतपरस्तों को बुतों से परहेज क्यों.? यूपी में जगह-जगह लग रहीं मायावती समेत बसपा प्रतीकों की बेपनाह मूर्तियों के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका का जवाब बसपा ने कुछ इसी अंदाज में दिया है। बसपा ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए मामले को परिवारवाद बनाम बहुजन समाज बनाने की कोशिश की है। बसपा के तेवरों से साफ है कि कोर्ट का रुख इस मामले पर चाहे जो रहे, विभिन्न हस्तियों की मूर्तियों लगाने के मामले पर वह लंबी राजनीतिक लड़ाई छेड़ कांग्रेस को भी शांति से नहीं बैठने देगी।
बसपा ने शनिवार को सुप्रीमकोर्ट में हलफनामा दाखिल कर याचिका को एक विपक्षी दल (कांग्रेस) प्रायोजित करार दिया है। साथ ही नेहरू-गांधी परिवार के नाम से देश में चल रहीं सैकड़ों परियोजनाओं का हवाला देते हुए कहा, गत छह दशकों से केंद्र और राज्य सरकारों की ज्यादातर बड़ी कल्याणकारी योजनाएं कांग्रेसी नेताओं के नाम से शुरू हुई। बसपा ने तीनमूर्ति भवन व राजघाट स्थिति नेताओं की समाधियों को भी मुद्दा बनाते हुए कहा, ये राजनैतिक प्रश्न हैं, इन पर कोर्ट सुनवाई नहीं कर सकता। यह हलफनामा सुप्रीमकोर्ट के नोटिस के जवाब में बसपा कोषाध्यक्ष अंबेद राजन ने दाखिल किया है। उन्होंने पिछले पांच सालों में शुरू हुई तमाम योजनाओं में पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी को सबसे ज्यादा तरजीह देने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, यहां तक सुभाष चंद्र बोस, महात्मा गांधी, मौलाना आजाद, चंद्रशेखर आजाद, भगत सिंह, लाला लाजपत राय, मंगल पांडेय, टीपू सुल्तान, बाल गंगाधर तिलक, गोपालकृष्ण गोखले, डा. भीम राव अंबेडकर की तुलना में राजीव के नाम से ज्यादा योजनाएं शुरू हुई। अब सोमवार को इस पर सुनवाई होगी। बसपा ने यह भी तर्क दिया कि याचिका में यह नहीं बताया गया है कि कोर्ट किस कानून के तहत इस मामले में दखल दे सकता है। वैसे भी मूर्तियां लगाने का चलन कांग्रेस शासनकाल से शुरू हुआ जब पंडित नेहरू, इंदिरा गांधी व राजीव गांधी की देश भर में इनकी सैकड़ों मूर्तियां लगाईं। तब किसी को आपत्ति नहीं हुई। उनका दावा है कि बसपा ने मतदाताओं की इच्छा के अनुरूप ही स्मारक बनवाये हैं।

A "short" list of schemes, roads etc. for Nehru-Gandhi dynasty promotion with Tax Payers money!

Following is the list of Government schemes and projects; universities and educational institutions; ports and airports;
National parks and sanctuaries; sports tournaments, trophies and stadia; hospitals and medical institutions;
national scientific and research institutions;
University chairs, scholarships and fellowships;
festivals;
roads and buildings named after three members of the Nehru Gandhi family,
Rajiv Gandhi,
Indira Gandhi and Jawaharlal Nehru,
which has been submitted to the Election Commission .
This list includes most of the projects, schemes and institutions funded by the Union Government and the Governments in the States.

Central

1 Rajiv Gandhi Grameen Vidyutikaran Yojana;
2 Rajiv Gandhi National Drinking Water Mission;
3 Rajiv Gandhi National Crèche Scheme for the Children of Working Mothers, Department of Women & Child Development;
4. Rajiv Gandhi Udyami Mitra Yojana;
5 Indira Awas Yojana
6 Indira Gandhi National Old Age Pension Scheme;
7 Jawaharlal Nehru Urban Renewal Mission
8 Jawaharlal Nehru Rojgar Yojna
9.Rajiv Gandhi Shramik Kalyan Yojna;
10 Indira Gandhi Canal Project, Funded by World Bank
11.Rajiv Gandhi Shilpi Swasthya Bima Yojana

State schemes

1 Rajiv Gandhi Rehabilitation Package for Tsunami Affected Areas,
2.Rajiv Gandhi Social Security Scheme, Govt. of Puducherry
3.Rajiv Ratna Awas Yojna;
4 Rajiv Gandhi Prathamik Shiksha Mission, Raigarh;
5 Rajiv Gandhi Shiksha Mission, Madhya Pradesh;
6 Rajiv Gandhi Mission on Food Security , Madhya Pradesh;
7. Rajiv Gandhi Mission on Community Health, Madhya Pradesh;
8 Rajiv Gandhi Rural Housing Corp.;
9 Rajiv Gandhi Tourism Development Mission, Rajasthan;
10 Rajiv Gandhi Computer Literacy Programme, Assam
11 Rajiv Gandhi Swavlamban Rojgar Yojana, Govt. of NCT of Delhi
12.Rajiv Gandhi Mobile Aids Counseling and Testing Services, Rajiv Gandhi Foundation
13.Rajiv Gandhi Vidyarthi Suraksha Yojana, Maharashtra;
14 Rajiv Gandhi Mission for Water Shed Management, M.P.;
15Rajiv Gandhi Food Security Mission for Tribal Areas, MP
16.Rajiv Gandhi Home for Handicapped, Pondicherry;
17 Rajiv Gandhi Breakfast Scheme, Pondicherry;
18 Rajiv Gandhi Akshay Urja Divas, Punjab;
19 Rajiv Gandhi Artisans Health & Life Insurance Scheme, Tamil Nadu;
20 Rajiv Gandhi Zopadpatti and Nivara Prakalpa, Mumbai;
21 Rajiv Arogya Sri programme, Gujrat State Govt. Scheme;
22 Rajiv Gandhi Abhyudaya Yojana, AP;
23 Rajiv Gandhi Computer Saksharta Mission, Jabalpur
24 Rajiv Gandhi Bridges and Roads Infrastructure Development Programme;
25 Rajiv Gandhi Gramin Niwara Prakalp, Maharashtra Govt
26Indira Gandhi Utkrishtha Chhattervritti Yojna , HP;
27 Indira Gandhi Women Protection Scheme, Maharashtra Gov;
28.Indira Gandhi Prathisthan, Housing and Urban Planning Department, UP Govt
29.Indira Kranthi Patham Scheme, Andhra Pradesh ;
30Indira Gandhi Nahar Pariyojana, State Govt. Scheme;
31 Indira Gandhi Vruddha Bhumiheen Shetmajoor Anudan Yojana, Govt. of Maharashtra
32.Indira Gandhi Nahar Project, Jaisalmer, Govt. of Rajasthan
33.Indira Gandhi Niradhar Yojna, Govt. of Maharashtra;
34 Indira Gandhi kuppam, State Govt.. Welfare Scheme for Tsunami effected fishermen;
35 Indira Gandhi Drinking Water Scheme-2006, Haryana Govt.
36.Indira Gandhi Niradhar Old, Landless, Destitute women farm labour Scheme, Maharashtra Govt.
37.Indira Gandhi Women Protection Scheme , Maharashtra Govt.
38.Indira Gaon Ganga Yojana, Chattisgarh;
39 Indira Sahara Yojana , Chattisgarh;
40 Indira Soochna Shakti Yojana, Chattisgarh;
41 Indira Gandhi Balika Suraksha Yojana , HP;
42 Indira Gandhi Garibi Hatao Yojana (DPIP), MP;
43 Indira Gandhi super thermal power project , Haryana Govt.
44 Indira Gandhi Water Project, Haryana Govt.
45.Indira Gandhi Sagar Project, Bhandara District Gosikhurd Maharashtra; 46 Indira Jeevitha Bima Pathakam, AP Govt;
47 Indira Gandhi Priyadarshani Vivah Shagun Yojana, Haryana Govt;
48 Indira Mahila Yojana Scheme, Meghalaya Govt
49.Indira Gandhi Calf Rearing Scheme, Chhattisgarh Govt.
50.Indira Gandhi Priyadarshini Vivah Shagun Yojana, Haryana Govt. 51.Indira Gandhi Calf Rearing Scheme;
52 Indira Gandhi Landless Agriculture Labour scheme, Maharashtra Govt.

Sports/Tournaments/ Trophies

1.Rajiv Gandhi Gold Cup Kabaddi Tournament;
2 Rajiv Gandhi Sadbhavana Run;
3.Rajiv Gandhi Federation Cup boxing championship
4.Rajiv Gandhi International tournament (football)
5.NSCI - Rajiv Gandhi road races, New Delhi;
6.. Rajiv Gandhi Boat Race, Kerala;
7Rajiv Gandhi International Artistic Gymnastic Tournament
8.Rajiv Gandhi Kabbadi Meet
9.Rajiv Gandhi Memorial Roller Skating Championshi;
10 Rajiv Gandhi memorial marathon race, New Delhi;
11Rajiv Gandhi International Judo Championship, Chandigarh
12.Rajeev Gandhi Memorial Trophy for the Best College, Calicut;
13 Rajiv Gandhi Rural Cricket Tournament, Initiated by Rahul Gandhi in Amethi
14.Rajiv Gandhi Gold Cup (U-21), football;
15 Rajiv Gandhi Trophy (football;
16. Rajiv Gandhi Award for Outstanding Sportspersons;
17 All Indira Rajiv Gandhi Basketball (Girls) Tournament, organized by Delhi State
18.All India Rajiv Gandhi Wrestling Gold Cup, organized by Delhi State 19.Rajiv Gandhi Memorial Jhopadpatti Football Tournament, Rajura; 20.Rajiv Gandhi International Invitation Gold Cup Football Tournament, Jamshedpur
21.Rajiv Gandhi Mini Olympics, Mumbai
22.Rajiv Gandhi Beachball Kabaddi Federation;
23 Rajiv Gandhi Memorial Trophy Prerana Foundation;
24 International Indira Gandhi Gold Cup Tournament;
25 Indira Gandhi International Hockey Tournament
26.Indira Gandhi Boat Race;
27.Jawaharlal Nehru International Gold Cup Football Tournamen;
28 Jawaharlal Nehru Hockey Tournament.

Stadiums

1.Indira Gandhi Sports Complex, Delhi ;
2.Indira Gandhi Indoor Stadium, New Delhi ;
3.Jawaharlal Nehru Stadium, New Delhi ;
4. Rajiv Gandhi Sports Stadium, Bawana
5.Rajiv Gandhi National Football Academy, Haryana; 6.Rajiv Gandhi AC Stadium, Vishakhapatnam
7.Rajiv Gandhi Indoor Stadium, Pondicherry;
8 Rajiv Gandhi Stadium, Nahariagun, Itanagar;
9.Rajiv Gandhi Badminton Indoor Stadium, Cochin;
10.Rajiv Gandhi Indoor Stadium, Kadavanthra, Ernak;
11.Rajiv Gandhi Sports Complex , Singhu
12..Rajib Gandhi Memorial Sports Complex, Guwahati ;
13.Rajiv Gandhi International Stadium, Hyderabad
14.Rajiv Gandhi Indoor Stadium, Cochin;
15.Indira Gandhi Stadium, Vijayawada, Andhra Pradesh;
16.Indira Gandhi Stadium, Una, Himachal Pradesh;
17.Indira Priyadarshini Stadium, Vishakhapatnam;
18 Indira Gandhi Stadium, Deogarh, Rajasthan
19.Gandhi Stadium, Bolangir, Orissa

Airports/ Ports

1.Rajiv Gandhi International Airport, New Hyderabad, A.P.
2.Rajiv Gandhi Container Terminal, Cochin
3.Indira Gandhi International Airport, New Delhi
4..Indira Gandhi Dock, Mumbai
5.Jawaharlal Nehru Nava Sheva Port Trust, Mumbai

Universities/Education Institutes

1.Rajiv Gandhi Indian Institute of Management, Shilong
2.Rajiv Gandhi Institute of Aeronautics, Ranchi, Jharkhand
3.Rajiv Gandhi Technical University, Gandhi Nagar, Bhopal, M.P.
4.Rajiv Gandhi School of Intellectual Property Law, Kharagpur, Kolkata; 5.Rajiv Gandhi Aviation Academy, Secundrabad ;
6 Rajiv Gandhi National University of Law, Patiala, Punjab;
7 Rajiv Gandhi National Institute of Youth Development, Tamil Nadu;
8 Rajiv Gandhi Aviation Academy, Begumpet, Hyderabad, A.P;
9.Rajiv Gandhi Institute of Technology, Kottayam, Kerala;
10 Rajiv Gandhi College of Engineering Research & Technology, Chandrapur, Maharashtra are among the 98 institutions named after Rajiv, Indira and Jawaharlal Nehru..

Awards

1..Rajiv Gandhi Award for Outstanding Achievement
2.Rajiv Gandhi Shiromani Award
3.Rajiv Gandhi Shramik Awards, Delhi Labour Welfare Board
4.Rajiv Gandhi National Sadbhavana Award
5.Rajiv Gandhi Manav Seva Award 6.Rajiv Gandhi Wildlife Conservation Award
7.Rajiv Gandhi National Award Scheme for Original Book Writing on Gyan Vigyan
8.Rajiv Gandhi Khel Ratna Award 9.Indira Gandhi Prize for National Integration;
10.Indira Gandhi Priyadarshini Award;
11.Indira Priyadarshini Vrikshamitra Awards, Ministry of Environment and Forests
12.Indira Gandhi Memorial National Award forBest Environmental & Ecological;
13 Indira Gandhi Paryavaran Purashkar;
14 Indira Gandhi NSS Award
15 Jawaharlal Nehru Prize" from 1998-99, to be given to organizations (preferably NGOs) for Popularization of Science;
16 Jawaharlal Nehru National Science Competition
17 Jawarharlal Nehru Student Award for research project of evolution of DNA are among the 51 named after the family members.

Scholarship / Fellowship

1.Rajiv Gandhi Scholarship Scheme for Students with Disabilities
2.Rajiv Gandhi National Fellowship Scheme for SC/ST Candidates,
३.Rajiv Gandhi National Fellowship Scheme for ST Candidates,
4 Rajiv Gandhi Fellowship, IGNOU;
5 Rajiv Gandhi Science Talent Research Fellows;
6.Rajiv Gandhi Fellowship, Ministry of Tribal Affairs;
7 Rajiv Gandhi National Fellowship Scheme for scheduled castes and scheduled tribes candidates given by UGC;
8Rajiv Gandhi Fellowship sponsored by the Commonwealth of Learning in association with IGNOU;
9 Rajiv Gandhi science talent research fellowship given by Jawaharlal Nehru Centre for advanced scientific research are among others named after the family members.

National Parks/Sanctuaries/ Museums

1.Rajiv Gandhi (Nagarhole) Wildlife Sanctury, Karnataka;
2.Rajiv Gandhi Wildlife Sanctury, Andhra Pradesh
3.Indira Gandhi National Park , Tamil Nadu;
4.Indira Gandhi Zoological Park , New Delh;
5 Indira Gandhi National Park, Anamalai Hills on Western Ghats ;
6.Indira Gandhi Zoological Park, Vishakhapatnam ;
7 Indira Gandhi Rashtriya Manav Sangrahalaya (IGRMS);
8.Indira Gandhi Wildlife Sanctuary, Pollachi;
9.Rajiv Gandhi Health Museum;
10.The Rajiv Gandhi Museum of Natural History
11.Indira Gandhi Memorial museum, New Delhi are parks and museums named after the family members.

Hospitals/Medical Institutions

1.Rajiv Gandhi University of Health Science, Bangalore, Karnataka;
2 Rajiv Gandhi Cancer Institute & Research Centre, Delhi;
3 Rajiv Gandhi Home for Handicapped, Pondicherry;
4 Shri Rajiv Gandhi college of Dental Science & Hospital, Bangalore, Karnataka;
5. Rajiv Gandhi Centre for Bio Technology, Thiruvanthapuram, Kerala;
6 Rajiv Gandhi College of Nursing, Bangalore, Karnataka;
7 Rajiv Gandhi Super Specialty Hospital, Raichur;
8 Rajiv Gandhi Institute of Chest Diseases, Bangalore, Karnataka;
9 Rajiv Gandhi Paramedical College, Jodhpur;
10.Rajiv Gandhi Medical College, Thane, Mumbai are among 39 medical institutions named after the family members. Maharashtra

Institutions/ Chairs/ Festivals

1.Rajiv Gandhi National Institute of Youth Development. (RGNIYD), Ministry of Youth and Sports;
2 Rajiv Gandhi National Ground Water Training & Research Institute, Faridabad, Haryana;
3.Rajiv Gandhi Food Security Mission in Tribal Areas
4.Rajiv Gandhi National Institute of Youth Development;
5..Rajiv Gandhi Shiksha Mission, Chhattisgarh;
6.Rajiv Gandhi Chair Endowment established in 1998 to create a Chair of South Asian Economics
7 Rajiv Gandhi Project - A pilot to provide Education thru Massive Satellite Connectivity up grassroot Level are among 37 named after Rajiv, Indira and Nehru.Pondicherry

Roads/Buildings/ places

1.Rajiv Chowk, Delhi;
2 Rajiv Gandhi Bhawan, Safdarjung, New Delhi;
3 Rajiv Gandhi Handicrafts Bhawan, New Delhi;
4 Rajiv Gandhi Park, Kalkaji, Delhi; 5 Indira Chowk, New Delhi;
6 Nehru Planetarium, New Delhi;
7 Nehru Yuvak Kendra, Chanakyapuri, New Delhi;
8 Nehru Nagar, New Delhi;
9 Nehru Place, New Delhi ;
10 Nehru Park, New Delhi Nehru House, BSZ Marg, New Delhi, are among 74 named after the family members.
और अब…Rajiv Gandhi Bandra Worli Sea Link

शहीदों के नाम के इंस्टीट्यूशन और अन्य संस्थानों के नाम गिन लीजिए। यह देश गांधी परिवार की जमींदारी हो गई है और मायावती सरकार पर बुतपरस्ती का आरोप लगा रहा है।















फायर करने के बाद जसवंत सिंह के विभिन्न रूप
और विरोध करने वाले व किताब लेकर उनसे मिलने वाले लोग