Monday, September 28, 2009

गोरक्षा के नाम पर देश में छेड़ेगा संघ संग्राम

- शंखनाद व वैदिक मंत्रोच्चारण के बीच संतों ने खींचा विश्व मंगल गो ग्राम यात्रा का रथ- गायत्री व कामधेनु यज्ञ से शुरू हुआ तीन दिवसीय उद्घाटन समारोह
कुरुक्षेत्र, २८ सितंबर :
संघ देश में साम्प्रदायिक विद्वेश घोलने का एक और मौका तलाशने जा रहा है। उसने सोमवार को विजय दशमी के पर्व पर शंखनाद और वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ कुरुक्षेत्र में रथ खींच कर गो ग्राम यात्रा का शुभारंभ किया। 108 दिन में यह यात्रा दो लाख गांवों से होती हुई करोड़ों लोगों को गोरक्षा का संकल्प दिलाएगी। 20 हजार किलोमीटर के सफर में देश के बड़े संत व नामचीन हस्तियां यात्रा में सम्मिलित होंगी। यात्रा के दौरान गोहत्या पर प्रतिबंध व गाय को राष्टï्रीय प्राणी घोषित करवाने की मांग पर 50 करोड़ लोगों के हस्ताक्षर करवाने का लक्ष्य रखा गया है। गायत्री और कामधेनु यज्ञ में आहुतियों के साथ विश्व मंगल गो ग्राम यात्रा का तीन दिवसीय उद्घाटन समारोह सोमवार को वैदिक रीति से शुरू हुआ। यात्रा के सूत्रधार गोकर्ण पीठ के स्वामी राघेश्वर भारती, राष्टï्रीय स्वयं सेवक संघ के सर कार्यवाह भैया जी जोशी, यात्रा के राष्टï्रीय समन्वयक डा. एचआर नागेंद्र व बड़ी संख्या गो भक्तों ने आहुति डाल कर गो रक्षा का संकल्प लिया। स्वामी राघेश्वर भारती ने कहा कि यह संग्राम धर्म के लिए है। विजय दशमी के पर्व पर शुरू इस अभियान में विजय निश्चित ही प्राप्त होगी। यह भूख से समृद्धि की ओर महान अभियान है। लोगों के त्याग और मेहनत से एक नया स्वर्ण काल शुरू होगा। इससे गऊ व भारतीय संस्कृति का गौरव पूरे विश्व में स्थापित होगा। स्वामी राघेश्वर भारती ने कहा कि भावी पीढ़ी की समृद्धि और इंडिया को फिर से भारत बनाने में इस अभियान की महत्वपूर्ण भूमिका होगी। राष्टï्रीय स्वयं सेवक संघ के सर कार्यवाह भैया जी जोशी ने इस अवसर पर कहा कि इस यात्रा के साथ स्वतंत्रता का दूसरा संग्राम शुरू होगा। इससे भारत ही नहीं पूरे विश्व का मंगल होगा। यह परिवर्तन का चक्र प्रारंभ हुआ है। यात्रा के राष्टï्रीय समन्वयक एवं नासा के पूर्व वैज्ञानिक और स्वामी विवेकानंद योग विश्वविद्यालय के संस्थापक कुलपति डा. एचआर नागेंद्र ने कहा कि देश में गाय आधारित जीवन पद्धति की नई शुरुआत होगी। यह संस्कृति के कल्याण का संकल्प है। इसके माध्यम से गांव की ओर जाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। एचआर नागेंद्र ने कहा कि गायों की उपयोगिता व उनसे स्वावलंबन की अवधारणा को रचनात्मक आधार देने के लिए गो वंश पर अनुसंधान किए जा रहे हैं। इससे कितना विश्व मंगल होगा यह तो संघ की मानसिकता से ही पता चल जाता है।

आरएसएस का असलहा प्रेम



भोपाल : राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के कार्यकर्ता संघ की स्थापना दिवस पर शस्त्र का प्रदशर्न करते हुए? लाठी से शुरुआत करते हुए संघ आज मशीन गन तक पहुंच गया है। हालांकि संगठन के पास अघोषित हथियारों में गैस सिलेंडर को बम के रूप में इस्तेमाल करना भी आता है।