Saturday, January 9, 2010

प्ले कार्ड् देखिए क्या कहते हैं इन एनजीओ वालों को


प्लेकार्ड पर क्या लिखा है-

१-हमको जिसने किया अनाथ
उनका तुम क्यों देते हो साथ?

२-हत्यारों के पनाहगार
किसके हक में मानवाधिकार?

३-इतना आंदोलन करवाते हो
कहां से पैसा लाते हो?


स्थानीय लोगों ने अब जाना मानवाधिकारवादियों को
ये तथाकथित मानवाधिकारवादियों की धोखाधड़ी लोगों के सामने उजागर हो चुकी है। दो दिन पहले संदीप पांडे और मेधा पाटकर दंतेवाड़ा भी गए थे वहां पुलिसिया जुल्म सह रहे आदिवासियों ने उन्हें घेर लिया। खबर तो यह भी है कि उन्हें तमाचा भी जड़ दिया गया। लेकिन यह सब क्यों? हो रहा है क्योंकि इन लोगों ने जनता के साथ धोखाधड़ी की है सिर्फ अपनी राजनीति चमकाने के लिए।
१९९८ में पोखरण में परमाणु विस्फोट के खिलाफ संदीप पांडेय ने पोखरण से सारनाथ तक की पैदल यात्रा की थी। उसमें जो लोग शामिल हुए उन्हें बाद में पता चला कि उस पूरी यात्रा को ब्रिटेन की फंडिंग एजेंसी आक्सफेम ने प्रायोजित किया। ये रंगे हुए मानवाधिकारी हैं। जनता को धीरे धीरे हकीकत मालूम हो रहा है... जनता अपने साथ हुए धोखे का बदला लेगी ही

3 comments:

रवि सिंह said...

बहुत बहुत धन्यवाद,
मेधापाटकर अपनी मानवाधिकार के नाम पर दुकान चला रही है, लोगों की समझ में आगया है और अब आम जनता इनका स्वागत जूते चप्पलों और सड़े अंडों से कर रही है

लेकिन कुछ एसे संवेदनाहीन बेईमान सच्चाई से आंखे मूंद कर बैठे हैं

सुमो said...

जो लोग हत्यारे नक्सलवादियों के हाथों अपने परिवार को गंवा चुके हैं इनके दर्द को समझने वाला कोई नहीं

हत्यारों के पनाहगार मानवाधिकारवादियों के पनाहगारों के लिये क्या कहैं?

डॉ महेश सिन्हा said...

कोई तो है महानगरों में इनकी पोल खोलने वाला . बड़े बड़े नामचीन नाम हैं इस गिरोह में . बधाई स्वीकार करें इस अतुलनीय प्रयास के लिए .