

छाया-१
नई दिल्ली : डीयू में एबीवीपी कार्यकर्ताओं ने जनचेतना सचल प्रदर्शनी वाहन को तोड़ डाला।
छाया-२
नई दिल्ली : रोष प्रदर्शन के लिए टूटे हुए कांच के बीच तख्ती लगा दी गई है-एबीवीपी के फासिस्ट गुंडों का सांस्कृतिक प्रदर्शन।
यह गाड़ी हिंदी पट्टी में प्रगितशील किताबें जनता के बीच पहुंचाने का काम एक दशक से कर रही है। इसमें भगत सिंह, प्रेमचंद, नागार्जुन, त्रिलोचन, मुक्तिबोध, रंगनायकम्मा, मैक्जिम गोर्की, चेखव, तोल्सतोय, जैक लंडन के साथ यूरोपीय, रशियन, अमेरिकी और एशियाई साहित्य व दर्शन की किताबें मिलती हैं। साथ ही साथ मार्कसवादी साहित्य भी मिलता है। लेकिन देश में एक खासतरह की ही विचारधारा चाहने वालों को यह मंजूर नहीं है। मानव इतिहास के सबसे दारुण दृश्यों के विलेन उनके नायक हैं।
हिटलर सबसे बड़ा योद्धा, मुसोलिनी प्रेरणा स्रोत, नाथू राम गोडसे उनका आदर्श और नरसंहारक नरेंद्र मोदी उनका नेता है। वे बड़े ठसके के साथ वेलेंटाइन डे पर महिलाओं का चीर हरण करने से भी नहीं शर्माते हैं, कुंठा ग्रस्तता और इतिहास विमुख ये मनुष्य के रूप में वानरी सेना साहित्य, संस्कृति और लोकतंत्र का चीरहरण कर उसे अपनी रखैल बनाने की कोशिश में बड़े बड़े सुनियोजित नरसंहार आयोजित करवाते हैं। नरकंकालों पर अट्टाहास करने वाले ये नरपिशाच इस देश को मध्यकालीन सभ्यता की कब्र बना देने पर तुले हुए हैं इसलिए हर जगह जहां सोच है विचार है, सभ्यता है उसे नेस्तनाबूद करना वे अपना परम कर्तव्य समझते हैं। उनकी संस्कृति है विध्वंस की।
कुछ दिनों पहले मध्य प्रदेश के प्रोफेसर की हत्या करने के बाद दो दिन पहले दिल्ली विश्वविद्यालय में भी उन्होंने यही किया है। शायद इसीलिए इस टूटी हुई गाड़ी पर एक तख्ती लगी हुई है-
एवीबीपी के फासिस्ट गुंडों का Òसांस्कृतिकÓ प्रदर्शन